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ऋतब्रत के गुट में या ममता के साथ?: तीन बागी विधायक दीदी के प्रदर्शन में पहुंचे; टीएमसी की कलह ने लिया नया मोड़
पश्चिम बंगाल में टीएमसी की अंदरूनी खींचतान के बीच ऋतब्रत बनर्जी कैंप से जुड़े तीन विधायक ममता बनर्जी समर्थित प्रदर्शन में शामिल हुए। इससे पार्टी के संगठनात्मक विवाद के बीच नया राजनीतिक संकेत मिला है।
पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस में जारी संगठनात्मक विवाद के बीच सोमवार को विधानसभा परिसर में नया राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया। ऋतब्रत बनर्जी कैंप से जुड़े तीन विधायकों ने ममता बनर्जी समर्थित गुट के प्रदर्शन में हिस्सा लिया। यह प्रदर्शन ममता बनर्जी के कंचरापाड़ा दौरे के दौरान उनके काफिले पर कथित हमले के विरोध में किया गया।
मेटियाब्रुज के विधायक अब्दुल खालिक मोल्ला, बशीरहाट के विधायक तौसिफुर रहमान और बारुईपुर ईस्ट के विधायक बिभास सरदार प्रदर्शन में शामिल हुए। तीनों उन 65 विधायकों में शामिल थे, जिन्होंने पहले ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष के नेता के पद के लिए समर्थन दिया था। टीएमसी में कुल 80 विधायक बताए गए हैं।
तौसिफुर रहमान ने कहा कि संगठनात्मक विवाद अलग मुद्दा है, जबकि उनका राजनीतिक समर्थन ममता बनर्जी के साथ है। उन्होंने कहा कि जहां ममता बनर्जी होंगी, वह वहीं रहेंगे। बिभास सरदार ने कहा कि टीएमसी के चुनाव चिन्ह पर जीतने वाले सभी विधायकों को कथित हमले के खिलाफ प्रदर्शन करना चाहिए।
अब्दुल खालिक मोल्ला ने स्पष्ट किया कि वह संगठनात्मक विवाद में ऋतब्रत बनर्जी के साथ हैं, लेकिन ममता बनर्जी पर कथित हमले के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं।
प्रदर्शन की तत्काल वजह रविवार को कंचरापाड़ा में हुई घटना थी। ममता बनर्जी वहां पुलिस हिरासत में मारे गए बीरजू केओट के परिवार से मिलने पहुंची थीं। आरोप है कि इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने उनके वाहन पर कीचड़ और चप्पल फेंकी तथा नारेबाजी की। ममता बनर्जी ने घटना को लेकर राज्य सरकार और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। भाजपा ने इन आरोपों को खारिज किया।
ममता समर्थित गुट के प्रदर्शन का नेतृत्व वरिष्ठ टीएमसी नेताओं ने किया। प्रदर्शनकारियों ने कथित हमले में शामिल लोगों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। राज्य के अन्य हिस्सों में भी टीएमसी कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब 2026 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद टीएमसी संगठनात्मक विभाजन से जूझ रही है। विपक्ष के नेता के पद को लेकर शुरू हुआ विवाद अब पार्टी के संगठन और निर्वाचित प्रतिनिधियों पर नियंत्रण की लड़ाई तक पहुंच गया है।
ऋतब्रत बनर्जी कैंप ने बाद में एक अलग संगठनात्मक बैठक कर वरिष्ठ विधायक अरूप राय को अध्यक्ष चुना और समानांतर राष्ट्रीय नेतृत्व संरचना की घोषणा की। कैंप का दावा है कि मौजूदा नेतृत्व ने निर्वाचित प्रतिनिधियों का बहुमत खो दिया है। तीन विधायकों का ममता समर्थित प्रदर्शन में शामिल होना इस आंतरिक राजनीतिक संघर्ष को और जटिल बनाता है।