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ग्लासगो से गुजरात पहुंचा कॉमनवेल्थ गेम्स का ध्वज, अहमदाबाद में 2030 की तैयारियां शुरू
ग्लासगो 2026 राष्ट्रमंडल खेलों के समापन के बाद कॉमनवेल्थ गेम्स का ध्वज गुजरात पहुंच गया है। इसके साथ ही अहमदाबाद में वर्ष 2030 में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारियां आधिकारिक रूप से शुरू हो गई हैं।
अहमदाबाद में वर्ष 2030 में आयोजित होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारियां अब औपचारिक रूप से शुरू हो गई हैं। ग्लासगो 2026 राष्ट्रमंडल खेलों के समापन के बाद कॉमनवेल्थ गेम्स का ध्वज गुजरात पहुंच गया, जिसे गांधीनगर में आयोजित मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को सौंपा गया।
समापन समारोह के दौरान यह ध्वज भारतीय प्रतिनिधिमंडल को सौंपा गया था। इसके साथ ही अहमदाबाद को आधिकारिक रूप से वर्ष 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी का अधिकार मिल गया।
खिलाड़ियों की मौजूदगी में हुआ कार्यक्रम
इस विशेष अवसर पर गुजरात के कई खिलाड़ी और पैरा-एथलीट भी मौजूद रहे। इनमें पैरा-एथलीट राकेश भट्ट, रोहित मजगुल और पैरा टेबल टेनिस खिलाड़ी सोनल पटेल शामिल थीं। कार्यक्रम में कई वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
ग्लासगो में भारत का शानदार प्रदर्शन
ग्लासगो 2026 राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। भारत ने कुल 39 पदक जीतकर पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया। भारतीय दल ने 13 स्वर्ण, 17 रजत और नौ कांस्य पदक अपने नाम किए।
भारतीय पैरा-एथलीटों ने भी बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए सात पदक जीते। इसके साथ ही भारत ने पैरा एथलेटिक्स में दो दशक बाद पदक जीतने का इंतजार खत्म कर दिया।
खेल अवसंरचना को मिलेगा बढ़ावा
उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने कहा कि अहमदाबाद वर्ष 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार खेल सुविधाओं को बेहतर बनाने और खिलाड़ियों को आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दे रही है।
उन्होंने कहा कि इस आयोजन से युवाओं को खेलों की ओर आकर्षित करने और फिटनेस को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
क्या है कॉमनवेल्थ गेम्स ध्वज का महत्व?
कॉमनवेल्थ गेम्स का ध्वज मौजूदा मेजबान शहर से अगले मेजबान शहर को सौंपा जाता है। यह केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि खेल भावना, एकता और सहयोग का प्रतीक भी माना जाता है।
अब गुजरात में यह ध्वज वर्ष 2030 तक सुरक्षित रखा जाएगा और यह आगामी राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारियों का प्रतीक बना रहेगा।